Tuesday, December 29, 2009

गैर को ही बनाया अपना यार

भूल जाता हूँ किसी पे मैने किया था उपकार
भूल जाता हूँ किसी ने मुझ पे किया था अत्याचार
मगर यारो कैसे भूल जाऊ किसी से मैने किया था प्यार
देकर मुझको एक गहरा जख्म
किसी गैर को ही बनाया था उसने अपना यार

2 comments:

संगीता पुरी said...

इस नए ब्‍लॉग के साथ नए वर्ष में हिन्‍दी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. अच्‍छा लिखते हैं आप .. आपके और आपके परिवार वालों के लिए नववर्ष मंगलमय हो !!

अजय कुमार said...

हिंदी ब्लाग लेखन के लिये स्वागत और बधाई । अन्य ब्लागों को भी पढ़ें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देने का कष्ट करें